बधाई हो, हमें राष्ट्रदादा मिल गए


- उत्कर्ष आनन्द 'भारत' 


"क्योंकि बाप भी कभी बेटा था" उसके बाद ही वो बाप बना.  लेकिन फिर प्रश्न ये उठता कि बाप का बेटा कब बाप बनेगा? मतलब ये कि बापू कब राष्ट्रपिता से राष्ट्रदादा बनेंगे? और प्रश्न भी स्वाभाविक है क्योंकि जो आदमी 1944 में बाप बना उसका बेटा 2019 तक बाप नहीं बन सका.

खैर अब चिंता की कोई बात नहीं है. 75 साल बाद ही सही महर्षि डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा किए गए 'HOWDY मोदी' यज्ञ द्वारा ये संभव हो गया है.  कुछ लोगों का ये मानना है कि ये यज्ञ, पुत्रेष्टि यज्ञ का अंग्रेजी वर्शन है. हालांकि इसमें उन देवी देवताओं का भी महत्वपूर्ण योगदान है जो मानव रूप में अवतरित हो कर 'मर्दाना जोश जगाएं' जैसी राष्ट्रीय योजना चलाकर देश को जागृत किया. इस राष्ट्रहित में अल्लाह भी पीछे नहीं रहे. उन्होंने भी डॉ. इमरान, डॉ. एम. जान जैसे पैगम्बरों को भेजकर इस राष्ट्रीय योजना में जान डाल दी और भारत की  धर्मनिरपेक्षता की नई मिशाल दी.
वैसे इस घटना की भविष्यवाणी श्री वेद व्यास जी महाराज के मानस पुत्र महर्षि संबित पात्रा जी ने पहले कर दी थी. उनकी इसी दूरदृष्टि को देखते हुए उन्हें ONGC का निदेशक बनाया गया.
                         
मोदी जी में भारत के बाप बनने पूरी योग्यता है. या यूं कहें बापू और मोदी जी एक दूसरे के पर्याय हैं. इनके समय में ही देश की अर्थव्यवस्था गिरी, मंहगाई बढ़ी, बेरोजगारी बढ़ी, भीड़ हत्या या मॉब लिंचिंग बढ़ी. जिस पर इनकी खूब आलोचना भी हुई. लेकिन इन्होंने उसपर सरकारी दवाब के अलावा कुछ नहीं किया. जबकि वो चाहते तो गुंडे भेज कर उन्हें मरवा सकते थे. ये उनके अहिंसात्मक होने का पर्याप्त प्रमाण हैं.

बापू को जितना प्यार देश की जनता से था उसके उलट इन्हें जनता का खून चूसने वाले कॉर्पोरेट जगत से उतना ही प्यार  है. इनके हर फैसले में कॉर्पोरेट जगत के लोगों के विशेष सुविधाएं रहती हैं. जो इनके निस्वार्थ प्रेम को दर्शाता है.

उदारता में  तो ये बापू से आगे निकल गए हैं. बापू ने तो गोली लगने के उपरांत भक्त हृदय नाथूराम जी से कोई बात तक नहीं की, सिर्फ 'हे राम' कह कर रह गए. उदारता के प्रतीक मोदी जी अपने समर्थकों के साथ गांधी जयंती की छुट्टियां भी मानते हैं और भक्त हृदय श्री श्री 1008 नाथूराम गोडसे जी के नाम का जाप करते हैं और उनकी महिमा गाते हैं.
                   
अंदर की बात बताऊं तो गुप्त सूत्रों से पता चला है कि भक्त हृदय श्री गोडसे जी को गांधी शांति एवं सद्भावना सम्मान से सम्मानित किया जाएगा. सत्य के मामले में  बापू और मोदी जी में समानताएं तो नहीं मिल रही हैं लेकिन हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि चारों वेद छहो शास्त्र, 18 हों पुराण को को पढ़कर प्रसाद स्वरूप में गौ मूत्र को ग्रहण करके हम दोनों में सत्य के मामले में समानताएं लाएंगे. क्यूँकि आपको तो पता है ही मोदी है तो मुमकिन है.

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