मैं बिहारी मज़दूर

- उत्कर्ष आनन्द 'भारत'



मैं,
मैं बिहारी मजदूर हूं साहब
हां वही,
आपके मील - फैक्ट्री में काम करने वाला
क्या फ़र्क़ पड़ता है
जब तक ज़रूरत है काम लो,
फिर धक्के मार कर बाहर निकाल दो
ये पहली बार थोड़े ही हुआ है
आए दिन महाराष्ट्र वालों के मालिकपना देखते होंगे
बहुत लोग तो स्टेटस भी लगाते होंगे 'soo sad' लिखकर
इससे ज्यादा हुआ तो कुछ नेता बयानबाजी कर लेंगे आपस में
बस, यहीं जा कर हो जाती है बात समाप्त
हम लोगों के लिए तो बिहार के बाहर ही शुरू हो जाता है 'विदेश'
इस बार ही देख लीजिए
साहबों ने विदेश जाकर हवाई जहाज से लाई ये महामारी
लिहाजा बंद कर दिया गया देश को
बंद कर दी गयी फैक्ट्रियां
और उस फैक्ट्रियों के साथ बंद हो गयी हमारी रोटियां
और फिर बंद कर दी ट्रेनें
उस पर आई सरकार की घोषणाएं,
जो सीमित रह गयीं सरकारी अफसरों तक
हम फिर भी नहीं हारें
भूखे ही चल दिए पैदल हजारों किलोमीटर दूर अपने देश 'बिहार'
पर,
पर हम तो बिहारी मजदूर हैं ना
एक परेशानी हल क्या निकाले, आ जाती है दूसरी
ये परेशानी कोई भागवान की बनाई नहीं होती है
इसे बनाते हैं इंसान
इस बार तो परेशानी बना कर नहीं
 ख़ुद बन कर आ गए इंसान
वर्दी पहन कर (पुलिस के रूप में)
फिर आगे की कहानी आप सोच सकते हैं
आप सोच रहे होंगे
हमारे सूबे के नेता क्यों नहीं कुछ करते
चिंता मत कीजिए
हमारे यहां के नेता जनताद्रोही हैं
और हम जिंदा हैं तो अपनी मेहनत और
आप जैसे कुछ अच्छे लोगों के दम पर
तो प्लीज आप अच्छे हैं इसका भ्रम बनाये रखियेगा
और कोई भूखा दिखे तो उसकी मदद कीजिएगा

सम्पादकीय- अभी लॉकडाउन के दौरान बिहारी मज़दूरों की स्थिति सबसे अधिक खराब थी. अधिकांश बिहारी मज़दूर बिहार से दूर किसी दूसरे राज्य में अभी भी फंसे हुए हैं. अगर आपके आस-पास कोई मज़दूर फंसे हुए हैं तो जितना मुमकिन हो उनकी मदद करें.

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