कोरोना वायरस का सांप्रदायिक रंग
कौस्तुभ रघुवंशी
"बर्बाद गुलिस्तां करने को
बस एक ही उल्लू काफी था
हर शाख पर उल्लू बैठा है,
जाने अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा"
कोरोना, इस वक्त और शायद इस सदी का सबसे चर्चित नाम. वैज्ञानिकों का मानना है यह महामारी पुरानी हृदय विदारक महाद्वीपीय महामारियों को पीछे छोड़ देगी. यही वजह है कि लगभग समूची दुनिया की सरकारों ने इस मुश्किल घड़ी में लोगों के सामान्य आवागमन पर पूरी तरह से रोक लगा दी. जिन जगहों पर इस लॉकडाउन का पालन ठीक ढंग से नहीं हुआ अथवा वहां की सरकारों ने सख्त फैसले लेने में देरी की वो देश चाहे चीन, इटली, स्पेन जैसे आर्थिक एवं चिकित्सकीय रूप से कितने भी सुसज्जित देश ना हो, इस महामारी ने इन सभी को झकझोर कर रख दिया. महाशक्ति अमेरिका तो इस महामारी से सर्वाधिक रूप से दहल उठा. वहां संदिग्धों एवं मौतों के मामले में एक रिकॉर्ड बन गया. मैं यहां पर हम प्रधानमंत्री जी को भी धन्यवाद देना चाहूंगा जिन्होंने सख्त फैसले लेने में एक क्षण की भी देरी नहीं की एवं भारत में पूर्ण रूप से लॉकडॉउन को लागू करवाया. ज़्यादातर लोग स्वयं इन पाबंदियों का पालन कर रहें हैं. मैं प्रधानमंत्री जी का एक और चीज के लिए भी धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने पूरी कर्मठता एवम् कर्त्तव्यपरायणता से इस महामारी में अपनी जान जोखिम में डालने वाले डॉक्टरों, नर्सो, पैरामेडिकल स्टाफ, पुलिस बल, सशस्त्र बल एवं अन्य सरकारी लोगों का उत्साहवर्धन करने के लिए पूरी देश को ताली-थाली बजाकर, दिया जलाकर धन्यवाद देने के लिए पूरे देश को प्रेरित किया.
" ये जब्र भी देखा है ,
तारीख की नजरो ने
लम्हों ने खता की,
सदियों ने सजा पायी"
परंतु कुछ असामाजिक एवं जाहिल तत्व ऐसे भी हैं, जो इस महामारी की मारक क्षमता को मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं. ऐसे लोग मानव बम से कम खतरनाक नहीं हैं. इन सभी से सख्ती से नहीं निपटा गया तो ये सभी पूरे देश के लिए भीषण संकट बन सकते हैं एवं शायद बन भी रहे हैं.
कुछ उदाहरण,
- कन्नौज शहर में जुमे की नमाज़ पढ़ने के लिए दर्जनों लोग इकट्ठा होने लगे. पुलिस और प्रशासन ने इन लोगों को समझाना चाहा कि ऐसा करना उचित नहीं है. देवबंद, फिरंगी महल और बरेली के उलेमाओं के साथ ही तमाम मुस्लिम विद्वान कह चुके हैं कि संकट के इन दिनों में घर ही पर नमाज पढ़ना उचित रहेगा, मगर भीड़ नहीं मानी. माहौल की गरमी बढ़ती गई और नमाज़ियों ने पुलिस बल पर हमला बोल दिया. बाद में बड़ी संख्या में पहुंचे सशस्त्र बलो ने उन्हें खदेड़ा.
- मेरठ में भी जो हुआ, वह भी हमारे कर्मठ पुलिस बलों पर किसी आतंकवादी हमले से कम नहीं था.
- पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में तो भीड़ नमाज़ पढ़ने के लिए भारी संख्या में जुट गई.
यह घटनाएं इतनी ही नहीं हैं. इसके अलावा भी तमाम स्थानों पर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमों पर हमले हो चुके हैं. ये कौन लोग हैं? किसके भड़कावे पर ऐसा कर रहे हैं? क्या उनमें इतनी भी समझ नहीं है कि उनकी इस हरकत से न केवल उनका बल्कि अन्य लोगों का जीवन भी खतरे में पड़ जाता है. इंदौर की घटना पर तो वरिष्ठ शायर राहत इंदौरी भी द्रवित हो उठे. दरअसल, दिल्ली के निज़ामुद्दीन में तबलीगी जमात के मरकज में शामिल होने आए काफी लोगों को रेस्क्यू किया गया है, तभी से माहौल बिगाड़ने की साज़िश रची जा रही है. इस संकट की घड़ी में भी मौलाना साद के नेतृत्व में इन सभी लोगों ने ऐसा पाखंड रचा, जिसकी जितनी निंदा की जाए कम ही होगी. इन जमातियो में को लोग क्वारांटाइन में रखे गए थे, उन्होंने ने भी ऐसी निंदनीय हरकते की, जिसकी कल्पना किसी धार्मिक व्यक्ति से तो बिल्कुल नहीं की जा सकती. गाजियाबाद के सरकारी अस्पताल में ती उन्होंने नर्सो के साथ ऐसा अश्लील एवं अभद्र व्यवहार किया, जो अकल्पनीय था.
इससे पहले उनमें से कुछ लोग जांच के लिए तैयार नहीं थे. वे इसे अपने मज़हब के खिलाफ बात रहे थे. हज़ारों की संख्या में ये जमाती आज भी देश के कई हिस्सों के मस्जिदों और मदरसों में फैले हुए हैं. देश में पहली बार ऐसा हो रहा है, जब खुद को किसी धार्मिक संगठन का हिस्सा बताने वाले लोग जन-स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील मुद्दे पर ऐसी हरकतें करते पाए जा रहे थे.
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस जमात में शामिल हुए लोगों में से 1023 उस शनिवार की शाम तक ही कोरोना पॉजिटिव पाए जा चुके थे. देश के लगभग 30 फीसदी मामलों के लिए अकेले जमात ज़िम्मेदार है. मंत्रालय का यह भी दावा है कि लॉकडाउन के लाभ पर इन लोगों ने पानी फेर दिया है. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इन सभी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून भी लगाया है.
मैं यहां पर सभी का ध्यान एक और विशेष बात की तरफ आकर्षित करना चाहूंगा कि ऐसी जाहिलाना हरकतों ने अन्य धर्मो के कट्टरपंथियों को बल दिया है. कुछ लोगों के कारण एक पूरी कौम पर निशाना साधा जाना अत्यन्त निंदनीय है. ये जो लोग भी हैं, इन सभी के खिलाफ केंद्र एवं राज्य सरकारों को सख्ती से पेश आना चाहिए एवं इस संकट के वक्त में धार्मिक भाईचारे और राष्ट्रवाद को भी बढ़ाने के सघन प्रयास करने होंगे. लोगों को भी इस काम में सरकार का पूरा समर्थन करना होगा- अफवाहों से बचना होगा, सरकार के आदेशों का पूर्ण रूप से पालन करना होगा, धार्मिक शिष्टाचार बढ़ाना होगा और कट्टरपंथी विचारधारा से ऊपर उठना होगा. बेशक यह वक्त समस्त मानव जाति के लिए घोर संकट का वक्त है, परंतु हम सभी, मिलकर, इस महामारी से पार पाने में अवश्य सफल होंगे.
संपादकीय- कोरोना वायरस जैसे महामारी के समय में हमें यकीनन फिजिकल डिस्टेंस रखना चाहिए और जो भी गाइडलाइन्स हैं उन्हें मानना चाहिए. जो भी ऐसा नहीं कर रहे हैं वो यकीनन ना सिर्फ खुद को बल्कि दूसरे लोगों को भी संकट में डाल रहे हैं. लेकिन ऐसे समय में भी कई लोग सांप्रदायिक हो गए हैं उसने अपील है कि मानवता के लिए, खुद के लिए और अपने परिवार के लिए डॉक्टर और सरकार का सहयोग करें.

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