ग्रामीण इलाकों में ग्राहक अधिकारों की धज्जियां उड़ाई जाती हैं
अमृता सिंह
ग्रामीण इलाके, कस्बे इत्यादि जगहों में दुकानों की कमी नहीं है लेकिन सही सामान का मिलना आज भी आफ़त है. आज के दौर में दैनिक जीवन जीने के लिए उत्पादों की आवश्यकता तो है ही चाहे वह किराने का सामान हो या कॉस्मेटिक का. इन उत्पादों का इस्तेमाल ग्रामीण इलाके के लोग भी करते हैं. यह उत्पाद उपयोगी होते हैं और हर कोई इन्हें खरीदता है फिर वह अमीर हो या गरीब. अमीर लोग तो ज़्यादातर शहरों में ही रहते हैं जिनको सही सामान मिल जाता है लेकिन आज भी जितना सामान समय सीमा से पहले इस्तेमाल किया जाना चाहिए था परन्तु अभी तक नहीं हुआ है जिसे अंग्रेजी में "एक्सपायर्ड प्रोडक्ट्स" बोला जाता है, इन उत्पादों को ग्रामीण इलाकों में बेचा जाता है. लोग सोचते हैं ग्रामीण लोग पढ़े-लिखे नहीं है ना तो उन्हें कोई हेलो ग्राम की पहचान है और ना ही किसी ख़ास ब्रांड की जानकारी तो वह सोचते हैं कि चलो कुछ भी हो दे देते हैं. आज के दौर में ग्रामीण इलाकों के 80% उत्पाद खराब होते हैं और उसकी नाप तौल भी खराब ही होती है. इस बात से हम सभी परिचित हैं कि ग्रामीण इलाके में बहुत कम बाज़ार होती हैं जहा हर तरह की जरूरत का सामान मिल जाए और इन बाजारों में भी 10 से 15 बस्तियों के लोग सामान खरीदने के लिए कोसों दूर चलकर आते हैं लेकिन फिर भी उन्हें सही सामान नहीं मिल पाता है.

दुनिया तो साक्षर हो रही है लेकिन इसका असर ग्रामीण इलाके में देखने को नहीं मिल रहा है क्योंकि वहां कभी विपणन अधिकारी आते ही नहीं हैं. यदि कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति सामान खराब होने का या मंहगाई का विरोध करे तो उस पर दुकानदार स्पष्ट शब्दों में बोल देता है कि "सारा पैसा ऊपर चला जाता है". आखिर कहीं ना कहीं तो भ्रष्टाचार हम पर हावी हो रहा है. कहीं चीनी में प्लास्टिक है तो कहीं नमक में शीशा और कभी ग्लूकोस में साबुन का स्वाद मिलता है. 40% उत्पादों का सील टूटा हुआ मिलता है. आखिर हमारे अधिकारी कब तक इसे अपनी जिम्मेदारी की तरह नहीं स्वीकारेंगे. एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के 60 फ़ीसदी ग्रामीण लोग अनुलिपि उत्पादों का सेवन कर रहे हैं.
कंपनियों के प्रबंधकों ने हमें बताया कि हमें किसी भी कंपनी का उत्पाद खरीदते वक्त होलो ग्राम देख लेना चाहिए फिर खरीदना चाहिए और दिए हुए बारकोड को जरूर मिला कर देख लेना चाहिए और हर उत्पाद का एक बैच कोड होता है उसे भी मिलाना चाहिए. कलम से लिखे हुए एमआरपी वाले उत्पाद खरीदने से बचें. कंपनी उत्पाद के खोल पर बैच नंबर, एमआरपी और सभी अन्य चीजें खुद छापती है. कुछ उत्पादों पर उनकी सही वर्तनी का इस्तेमाल नहीं होता है तो कुछ उत्पादों में उनकी लिखावट और रंग बदला होता है. हमारे सभी उत्पादों पर एक कस्टमर केयर का नंबर होता है हम अपनी शिकायत उस पर दर्ज करा सकते हैं. हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम अपना उत्पाद सही व्यापारी से ही खरीदें. ज्यादा छूट के नाम पर भी हम ठगे जा सकते हैं और विशेष जानकारी के लिए हम कंपनी के दिए हुए नंबर पर भी संपर्क कर सकते हैं.
ग्रामीण इलाकों के लोग आज भी इतने जागरूक और इन सब दिशानिर्देशों से परिचित नहीं हैं, भले ही शहर ऑनलाइन शॉपिंग पर चल रहा हो लेकिन ग्रामीण लोग को आज भी अच्छा सामान नहीं मिल रहा है.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ:
चर्म रोग विशेषज्ञ का कहना है कि सुंदर दिखने के लिए आज का युवा वर्ग हजारों रुपए खर्च करने को तैयार है. लोगों में सुंदर दिखने और अच्छे दिखने की होड़ मची हुई है, इस चीज का सौंदर्य प्रसाधन बेचने वाली कंपनियां बहुत फायदा उठाती है. बाजार में भी नामी कंपनियों के नकली सौंदर्य से जुड़े उत्पादों की भरमार है. सिर्फ कंपनियों के नाम पर ज्यादा कीमत वसूली जाती है. यह उत्पाद आपकी त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं. यही नहीं बल्कि इन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा भी है.
जरा सी सावधानी आपको इन खतरों से बचा सकती है.
ग्रामीण इलाके, कस्बे इत्यादि जगहों में दुकानों की कमी नहीं है लेकिन सही सामान का मिलना आज भी आफ़त है. आज के दौर में दैनिक जीवन जीने के लिए उत्पादों की आवश्यकता तो है ही चाहे वह किराने का सामान हो या कॉस्मेटिक का. इन उत्पादों का इस्तेमाल ग्रामीण इलाके के लोग भी करते हैं. यह उत्पाद उपयोगी होते हैं और हर कोई इन्हें खरीदता है फिर वह अमीर हो या गरीब. अमीर लोग तो ज़्यादातर शहरों में ही रहते हैं जिनको सही सामान मिल जाता है लेकिन आज भी जितना सामान समय सीमा से पहले इस्तेमाल किया जाना चाहिए था परन्तु अभी तक नहीं हुआ है जिसे अंग्रेजी में "एक्सपायर्ड प्रोडक्ट्स" बोला जाता है, इन उत्पादों को ग्रामीण इलाकों में बेचा जाता है. लोग सोचते हैं ग्रामीण लोग पढ़े-लिखे नहीं है ना तो उन्हें कोई हेलो ग्राम की पहचान है और ना ही किसी ख़ास ब्रांड की जानकारी तो वह सोचते हैं कि चलो कुछ भी हो दे देते हैं. आज के दौर में ग्रामीण इलाकों के 80% उत्पाद खराब होते हैं और उसकी नाप तौल भी खराब ही होती है. इस बात से हम सभी परिचित हैं कि ग्रामीण इलाके में बहुत कम बाज़ार होती हैं जहा हर तरह की जरूरत का सामान मिल जाए और इन बाजारों में भी 10 से 15 बस्तियों के लोग सामान खरीदने के लिए कोसों दूर चलकर आते हैं लेकिन फिर भी उन्हें सही सामान नहीं मिल पाता है.

दुनिया तो साक्षर हो रही है लेकिन इसका असर ग्रामीण इलाके में देखने को नहीं मिल रहा है क्योंकि वहां कभी विपणन अधिकारी आते ही नहीं हैं. यदि कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति सामान खराब होने का या मंहगाई का विरोध करे तो उस पर दुकानदार स्पष्ट शब्दों में बोल देता है कि "सारा पैसा ऊपर चला जाता है". आखिर कहीं ना कहीं तो भ्रष्टाचार हम पर हावी हो रहा है. कहीं चीनी में प्लास्टिक है तो कहीं नमक में शीशा और कभी ग्लूकोस में साबुन का स्वाद मिलता है. 40% उत्पादों का सील टूटा हुआ मिलता है. आखिर हमारे अधिकारी कब तक इसे अपनी जिम्मेदारी की तरह नहीं स्वीकारेंगे. एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के 60 फ़ीसदी ग्रामीण लोग अनुलिपि उत्पादों का सेवन कर रहे हैं.
कंपनियों के प्रबंधकों ने हमें बताया कि हमें किसी भी कंपनी का उत्पाद खरीदते वक्त होलो ग्राम देख लेना चाहिए फिर खरीदना चाहिए और दिए हुए बारकोड को जरूर मिला कर देख लेना चाहिए और हर उत्पाद का एक बैच कोड होता है उसे भी मिलाना चाहिए. कलम से लिखे हुए एमआरपी वाले उत्पाद खरीदने से बचें. कंपनी उत्पाद के खोल पर बैच नंबर, एमआरपी और सभी अन्य चीजें खुद छापती है. कुछ उत्पादों पर उनकी सही वर्तनी का इस्तेमाल नहीं होता है तो कुछ उत्पादों में उनकी लिखावट और रंग बदला होता है. हमारे सभी उत्पादों पर एक कस्टमर केयर का नंबर होता है हम अपनी शिकायत उस पर दर्ज करा सकते हैं. हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम अपना उत्पाद सही व्यापारी से ही खरीदें. ज्यादा छूट के नाम पर भी हम ठगे जा सकते हैं और विशेष जानकारी के लिए हम कंपनी के दिए हुए नंबर पर भी संपर्क कर सकते हैं.
ग्रामीण इलाकों के लोग आज भी इतने जागरूक और इन सब दिशानिर्देशों से परिचित नहीं हैं, भले ही शहर ऑनलाइन शॉपिंग पर चल रहा हो लेकिन ग्रामीण लोग को आज भी अच्छा सामान नहीं मिल रहा है.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ:
चर्म रोग विशेषज्ञ का कहना है कि सुंदर दिखने के लिए आज का युवा वर्ग हजारों रुपए खर्च करने को तैयार है. लोगों में सुंदर दिखने और अच्छे दिखने की होड़ मची हुई है, इस चीज का सौंदर्य प्रसाधन बेचने वाली कंपनियां बहुत फायदा उठाती है. बाजार में भी नामी कंपनियों के नकली सौंदर्य से जुड़े उत्पादों की भरमार है. सिर्फ कंपनियों के नाम पर ज्यादा कीमत वसूली जाती है. यह उत्पाद आपकी त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं. यही नहीं बल्कि इन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा भी है.
जरा सी सावधानी आपको इन खतरों से बचा सकती है.

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